मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं,
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है..
मुझे खैरात में मिली ख़ुशियाँ अच्छी नहीं लगती, मैं अपने ग़मों में भी रहता हूँ नवाबो की तरह।
हम ना बदलेंगे वक्त की रफ्तार के साथ जब भी मिलेंगे पुराने ही होंगे।
ऐ जिंदगी जितनी मर्ज़ी परेशानियाँ बड़ा दे, वादा है मेरा, तुझे हँस के गुजारेंगे।



